नई दिल्ली। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा हर 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाता है। सरकारी तंत्र इस दिन बड़ी-बड़ी बातें करता है। बताता है कि यह बीमारी मच्छर काटने से होती है। पर मच्छर के पनपने की जगहों पर चोट नहीं की जाती। बिडम्बना है कि कहने को तो सरकार स्वच्छता अभियान चलाती है पर इसके बाद भी नालिया क्यों बजबजाती हैं? किसी अधिकारी के पास इसका जवाब नहीं होगा। जगह-जगह कूड़े का ढेर क्यों लगा रहता है? इस सवाल पर जिम्मेदार अफसरों के पास कोई जवाब नही है। सरकार को इन सबकी सुध तब आती है जब डेंगू से कई मौत हो जाती है।
देशभर में डेंगू कहर बरपा रहा है, लोग अस्पतालों में तड़प हैं पर सरकार अभी तक डेंगू जैसी बीमारी से ही निपटने का इंतजाम नहीं कर पा रही है। आधी से ज्यादा मौते सिर्फ इसलिए हो रही है क्योंकि अस्पतालों में समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं है। ये आरोप नहीं हैं। तमाम मीडिया रिपोर्ट में आए दिन ऐसी बातें होती रहती हैं। इस बीमारी के बारे में सभी जानते हैं कि यह बीमारी मच्छर के काटने से होती है। इस रोग की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में ही हर साल 5,00,000 से ज्यादा लोग इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। रात में हड्डी तोड़ बुखार के रूप में मशहूर डेंगू एक वायरसजनित बीमारी है, जो एडीज मच्छर के काटने से व्यक्ति के शरीर में पहुंचता है।
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